जंतर मंतर वेधशाला

उज्जैन में राजा जय सिंह द्वारा बनाई गई वेधशाला भी है। जंतर-मंतर यंत्र महल नाम से जानी जाने वाली यह वेधशाला शहर की आधुनिक बस्ती माधव नगर के किनारे पर है। राजा जय सिंह की ज्योतिष और ग्रह विज्ञान में काफी रुचि थी और वे चाहते थे कि भारतीय ज्योतिष में ग्रहों का गणित यथार्थ हुआ करे। इसी खयाल से उन्होंने उज्जैन के अलावा जयपुर, काशी, दिल्ली और मथुरा में भी वेधशालाएं बनवाई। समय के साथ मथुरा और काशी की वेधशालाएं ध्वस्त हो गई। अब सिर्फ उच्चैन, जयपुर और दिल्ली की वेधशालाएं ही बची हैं। उच्चैन की वेधशाला में बड़े आकार के पत्थर और ईट से बने चार यंत्र हैं। इनसे काल, नवांश, दिशा, दिगंश और ग्रहों का सूक्ष्म ज्ञान किया जा सकता है। आज भी कई लोग इसका उपयोग करते हैं।
मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में कितने मंदिर हैं और कितने भगवान इसका कोई हिसाब नहीं है। शहर के हर कोने, गली-कूचे में मंदिर और मूर्तियां स्थापित हैं। हजारों की तादाद में बने इन मंदिरों को कोई देखने लगे तो महीनों तक पार न पा सके। शहर में उद्योग और मनोरंजन के साधन न के बराबर हैं। शहर की खूबसूरती अगर कहीं है तो वह यहां के मंदिरों और पत्थरों की मूर्तियों में। शहर में उद्योग न होने के कारण यहां काम के सीमित अवसर हैं और यही कारण है कि यहां अमीर लोग भी गिने-चुने हैं। उज्जैन उन लोगों के लिए खासतौर से भ्रमण के अनुकूल है जो धर्मपरायण हैं या भारत की सांस्कृतिक परंपरा को खोजने में दिलचस्पी रखते हैं।