गोपाल मंदिर

गोपाल मंदिर उज्जैन नगर का दूसरा सबसे बड़ा मंदिर है।यह मंदिर नगर के मध्य व्यस्ततम क्षेत्र में स्थित है। मंदिर का निर्माण महाराजा दौलतराव सिंधिया की महारानी बायजा बाई ने लगभग ढाई सौ साल पहले सन् 1833 के आसपास करवाया गया था। नगर के मध्य में स्थित इस मंदिर श्री द्वारकाधीश की प्रतिमा है, अतः इसे द्वारकाधीश श्री गोपाल मंदिर भी कहा जाता है । मंदिर के गर्भगृह में लगा चांदी का रत्नजडित द्वार श्रीमंत सिंधिया ने गजनी से प्राप्त किया था, जो सोमनाथ की लूट में वहां पहुँच गया था. मंदिर का शिखर सफ़ेद संगमरमर तथा शेष मंदिर सुन्दर काले पत्थरों से निर्मित है । मंदिर का प्रांगण और परिक्रमा पथ भव्य और विशाल है. जन्माष्टमी यहाँ का विशेष पर्व है. बैकुंठ चौदस के दिन श्री महाकाल की सवारी हरिहर मिलन हेतु मध्यरात्रि में यहाँ आती है तथा भस्म आरती के समय श्री गोपाल कृष्ण की सवारी महाकालेश्वर जाती है और वहां तुलसीदल अर्पित किया जाता है ।